Thursday, February 7, 2019

मांसाहार बनाम शाकाहार: एक व्यावहारिक दृष्टिकोण


मांसाहार का संबंध सिर्फ़ इस्लाम से नहीं है दुनिया की 80% से ज़्यादा आबादी मांसाहारी है शाकाहार विश्वपटल पर एक व्यवहारिक धारणा या विचारधारा नहीं है।
यदि आप दुनिया के कुछ देशों में जहाँ अत्याधिक बर्फ होने के कारण खेती संभव नहीं है शाकाहार की बात भी करेंगे तो लोग आप के दुश्मन बन जायेंगे और हो सकता है आपको जान के लाले पड़ जाएँ और कुछ देशों में तो समुन्द्री जीवों (मछलियां, केकड़ा आदि) को शाकाहार में ही शुमार किया जाता है और अधिकतर पश्चिमी देशों में जहां खेती होती भी है वहां शाकाहारी वस्तुएँ (दाल, सब्ज़ियां आदि) इतनी महँगी होती है कि वहा के पैसे वाले लोग ही दाल सब्ज़ियों को खा पाते है।

इसके अतिरिक्त मनुष्य वैज्ञानिक रूप से भी सर्वहारी प्राणी है अर्थात वह प्राणी जो शाकाहार और मांसाहार दोनों का सेवन कर सकता है मनुष्य की रचना ही ईश्वर ने इस प्रकार की है कि वह दाल सब्ज़िया भी खा सके और मांस भी वरना जो जीव शाकाहारी होते है वो मांसाहार का सेवन कर ही नहीं कर सकते ना ही उनका शरीर मांसाहार को स्वीकार करता है उनका पाचन तंत्र सिर्फ शाकाहार के लिये बना होता है, जो मांस को पचा ही नहीं सकता एक बकरी को आप मांस दीजिए खाने को वो उसे कदापि नहीं खाएगी और ना ही उसे पचा पाएगी इसके उलट जो मांसाहारी जन्तु होते हैं उनकी शारीरिक संरचना इस प्रकार से होती है कि उनका शरीर शाकाहार को स्वीकार ही नहीं कर सकता आप एक शेर को सब्ज़िया दीजिए खाने को वो उन्हें नहीं खायेगा ना ही उसका पाचन तंत्र उसे स्वीकार करेगा।

यह ईश्वर की बनायी हुई व्यवस्था है उसी ने शाकाहारी चीज़ों के साथ कुछ जीव भी खाने योग्य बनाये है,अगर ईश्वर मनुष्य को शाकाहारी बनाना चाहता तो वो शाकाहारी जीवो की तरह उसका पाचन तंत्र इस प्रकार से बनाता की वो केवल शाकाहारी वस्तुओं को खा पाएं कुछ लोग मांसाहार को जीव हत्या से भी जोड़ कर देखते है जो कि पूर्णतः अव्यावहारिक बात है क्यूँकि इस धरती की रचना ही अल्लाह (ईश्वर) ने इस प्रकार से की हैं कि यहा हर स्थान और वस्तु का संबन्ध जीव से है हर वस्तु में जीव और जीवन मौजूद है।

हम साँस लेते है तब वायु में मौजूद अनेकों सूक्ष्म जीवों की हत्या होती है खेती के दौरान तो असंख्य सूक्ष्म जीव मारे जाते हैं और विज्ञान बताता है कि पेड़-पौधे में भी जीवन होता है तो क्या यह जीव हत्या नहीं? और केवल यही क्यूँ बाज़ार में जो मच्छर, मक्खी, चूहे, कॉकरोच आदि मारने की दवाई बिकती है क्या उससे जीव हत्या नहीं होती फिर उसका विरोध क्यूँ नहीं?

#मांसाहार_व्यावहारिक_दृष्टिकोण
 #NonVegFoodVSVegFood

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