Tuesday, July 30, 2013

पवित्र क़ुरान में मानवता का सन्देश :

और जो लोग तुमसे लड़ते हैं, तुम भी अल्लाह की राह में उनसे लड़ो, मगर ज़्यादती करना की अल्लाह ज़्यादती करने वालो को दोस्त नहीं रखता।"
- क़ुरान 2:190



"ऐ ईमान वालो ! अल्लाह के लिए इन्साफ की गवाही देने के लिए खड़े हो जाया करो और लोगो की दुश्मनी तुम को इस बात पर तैयार करे की इन्साफ छोड़ दो। इंसाफ किया करो की यही परहेज़गारी की बात हैं और अल्लाह से डरते रहो कुछ शक नहीं की अल्लाह तुम्हारे कामो से ख़बरदार हैं।"
- कुरान 5:08

"अल्लाह न्याय और भलाई और रिश्तेदारों के हक़ अदा करने का आदेश देता हैं और बुराई और अश्लीलता और ज़ुल्म  ज़्यादती से रोकता हैं। वह तुम्हे नसीहत करता हैं ताकि तुम शिक्षा लो।"
कुरान 16:90



"जिन लोगो ने तुमसे दीन के बारे में जंग नहीं की और तुमको तुम्हारे घरो से निकाला, उनके साथ भलाई और इन्साफ का सुलूक करने से अल्लाह तुमको मन नहीं करता, अल्लाह तो इन्साफ करने वालो को दोस्त रखता हैं।"
- कुरान 60:08










कुरान में Orbits, Gasseous Mass, Nebula aur Big Bang theory का ज़िक्र:


"सूर्य चन्द्रमा को अपनी ओर खींच नहीं सकता और ना दिन, रात से आगे निकल सकता है. ये सब एक कक्षा (orbit) में अपनी गति के साथ चल रहे है."
- कुरान 36:40

दिन के रात से आगे निकलने के शब्द देखिये, पृथ्वी से ऊंचाई पर जाकर देखा जाये तो इस दृश्य का इन्ही शब्दों में उल्लेख किया जा सकता है की दोनों एक दुसरे का पीछा कर रहे है. इसके अतरिक्त आयत में "यसबाहून" शब्द है जिसका अर्थ है की वो अपनी गति के साथ चल रहे हैं अर्थात आयत में बता दिया गया है की सूर्ये चन्द्रमा और पृथ्वी अपनी-अपनी धुरी (Axis) पर घूम रहे है और इस गति के साथ-साथ अपनी-अपनी कक्षों (Orbits) में भी घूम रहे है. बीसवी शताब्दी में आकर विज्ञान (Science) ने बताया की सूर्य अपनी धुरी (Axis) पर एक चक्कर 25 दिन में पूरा करता है और अपनी कक्षा (Orbits) में 125 मील प्रति सेकंड (7,20,000 प्रति किलोमीटर प्रति घंटे) की गति से चलते हुए एक चक्कर 25 करोड़ वर्ष में पूरा करता है. आधुनिक विज्ञानिक शोध ने अब यह बताया हैं की सूर्य व चन्द्रमा की जीवन अवधि एक दिन समाप्त हो जाएगी और यह की सूर्य एक विशेष दिशा में भी बहा चला जा रहा है. आज विज्ञान ने उस स्थान को निश्चित भी कर दिया है जहा सूर्य जाकर समाप्त होगा. उसे Solar Apex का नाम दिया गया हैं और सूर्य उसकी ओर 12 मील प्रति सेकंड की गति से बढ़ रहा है.
अब ज़रा बीसवी सदी के इन अनुसंधानों को कुरान की दो आयतों में देखे

"क्या तुमने इस पर दृष्टि नहीं डाली की अल्लाह रात को दिन में और दिन को रात में प्रवेश करता है. सूर्य और चन्द्रमा को काम में लगा रखा है. हर एक निश्चित काल तक ही चलेगा (और अल्लाह जब ऐसा सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञानी है तो) अल्लाह तुम्हारे सारे कर्मो की जानकारी भी रखता है."
- कुरान 31:29

इस आयत में एक निश्चित समय तक सूर्य और चन्द्रमा की जीवन का उल्लेख किया गया है और अब सूर्य के एक विशिष्ट स्थान की ओर खिसकने का वर्णन -
"और एक निशानी यह भी है की सूर्य अपने लक्ष्य की और चला जा रहा है. यह एक अथाह ज्ञान वाले (अल्लाह) का निश्चित किया हुआ हिसाब है"
- कुरान 36:38

यह आकाशगंगा, सर मंडल, तथा पृथ्वी व आकाश कैसे उत्पन्न हुए इस सम्बन्ध में कुरान ने संकेत दिया था -
"फिर उसने (अल्लाह ने) ध्यान किया और वो पहले धुंआ (Gasseous Mass) था"
- कुरान 41:41

"क्या इनकार करने वाले नहीं देखते की आकाश और पृथ्वी प्रारंभ में एक थे फिर हमने उन्हें अलग-अलग किया और हर जीव की उत्पत्ति का आधार पानी को बनाया? क्या अब भी वो ईमान नहीं लायेंगे?"
- कुरान 21:30

उपरोक्त दोनों आयते Nebula और विशाल विस्फोट सिध्धांत (big-bang theory) की ओर संकेत करती है. यह भी विशिष्ट रूप से नोट कर लें की इन सब आयतों में ईश्वर ने इनकार करने वालो को ईमान लाने का निर्देश ये कहते हुए दिया हैं की हमारे इन चमत्कारों को देख कर भी तुम क्यों ईमान नहीं लाते. 1400 साल पहले कोई व्यक्ति अपने सामान्य जीवन के अनुभवों पर आधारित साधारण सी कविता के रूप में लोगो के समक्ष प्रस्तुत करता तो उसमे चुनोती न होती की यह साधारण बाते नहीं, वरना ईश्वर का वो महान चमत्कार हैं जिन्हें देख कर तुम्हे ईमान लाना ही चाहिए.

अल्लाह ने कुरान में फ़रमाया है -
"आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है, उसे हमने तुम्हारे अधीन कर दिया है और इस तथ्य में उन लोगो के लिए निशानियाँ हैं जो चिंतन करते हैं."
- कुरान 45:13



Monday, July 29, 2013

क्या काबा शिव मंदिर हैं?

इस्लाम इंसानियत के लिए शान्ति का धर्म


मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पवित्र जीवनी पढने के बाद मैने पाया की आपने एकेश्वरवाद के सत्य को स्थापित करने के लिए अपार कष्ट झेले.
मक्का के काफिर सत्य धर्म की राह में रोड़ा डालने के लिए आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को तथा आपके सत्य मार्ग पर चलने वाले मुसलमानों को लगातार 13 सालो तक हर तरह से प्रताड़ित व अपमानित करते रहे. इस घोर अत्याचार के बाद भी आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने धैर्य बनाये रखा. यहाँ तक की आपको अपना वतन छोड़ कर मदीना जाना पड़ा. लेकिन मक्का के मुशरिक कुरेश ने आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का व मुसलमानों का पीछा यहाँ भी नहीं छोड़ा. जब पानी सर से ऊपर हो गया तो अपनी व मुसलमानों की तथा सत्य की रक्षा के लिए मजबूर हो कर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को लड़ना पड़ा इस तरह आप पर व मुसलमानों पर लड़ाई थोपी गयी.
इन्ही परिस्थितियों में सत्य की रक्षा के लिए जिहाद (यानी आत्मरक्षा व धर्म रक्षा के लिए धर्मयुद्ध) की आयते और अन्यायी तथा अत्याचारी काफ़िरो व मुशरिको को दंड देने वाली आयते अल्लाह की ओर से आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर आसमान से उतरी.
पेयगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) द्वारा लड़ी गयी लडाईया आक्रमण के लिए न हो कर, आक्रमण व आतंकवाद से बचाव के लिए थी, क्यूंकि अत्याचारियों के साथ ऐसा किये बिना शान्ति की स्थापना नहीं हो सकती थी. अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सत्य तथा शान्ति के लिए अंतिम सीमा तक धैर्य रखा और धैर्य की अंतिम सीमा से युद्ध की शुरुआत होती है. इस प्रकार का युद्ध ही धर्म युद्ध कहलाता है.
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य हैं की कुरेश जिन्होंने आप व मुसलमानों पर भयानक अत्याचार किये थे, फ़तेह मक्का ( यानी मक्का विजय) के दिन वह थर-थर काँप रहे थे की आज क्या होगा? लेकिन आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उन्हें माफ़ कर गले लगा लिया.
पेयगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की इस पवित्र जीवनी से सिद्ध होता है की इस्लाम का अंतिम उद्देश्य दुनिया में सत्य और शान्ति स्थापना और आतंकवाद का विरोध है.
अत: इस्लाम को हिंसा व आतंक से जोड़ना सबसे बड़ा असत्य है. यदि कोई ऐसी घटना होती है तो उसको इस्लाम से या सम्पूर्ण मुस्लिम समुदाय से जोड़ा नहीं जा सकता.
- स्वामी लक्ष्मिशंकराचार्ये, 'इस्लाम आतंक या आदर्श', भाग 1 पेज 19-20