ईश्वर (अल्लाह) ने मनुष्य को समझ और दिमाग़ दिया है उसका प्रयोग करें सत्य और असत्य को ढूँढने मैं
बात सही है कि धर्म के नाम पर लोग मारे जाते है, किन्तु वास्तविकता में कुछ पाखंडी लोग धर्म का नाम ले कर अधर्म के द्वारा फसाद और कत्लेआम करते है?
जबकि धर्म दीन तो शान्ति और नैतिकता की बात करता है।
धर्म के बिना दुनिया रहने लायक ही नहीं बचेगी।
क्यूँकि फ़िर मानवता के बुनियादी उसूल और नैतिकता के लिये कोई धरातल ही नहीं बचेगा।
धर्म से बंधे होने के बाद भी जानते बुझते लोग कितनी जुल्मो ज़्यादती करते है?
यदि उन्हें खुली छूट मिल जायें तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि क्या होगा?
नैतिकता का कोई मैयार ही नहीं बचेगा।
हर वह बात जिसे नैतिकता मानते है उसे चैलेंज किया जा सकेगा।
अच्छाई और बुराई का पैमाना ही ख़त्म हो जायेगा और दुनिया मे बहुसंख्या द्वारा अल्पसंख्यकों का, ताक़तवर द्वारा कमज़ोर का दमन और उत्पीड़न आम हो जाएगा।
धर्म आवश्यक है इसीलिये हमारे पैदा करने वाले ने हमे धर्म दिया।
लेकिन स्वार्थी मनुष्यों ने हमेशा धर्म को अपने कंट्रोल में करने की कोशिश की और ईश्वर के आदेशों में अपने स्वार्थ के लिये बदलाव किये
जिसके परिणामस्वरूप धर्म के नाम पर अधर्म वुजूद मे आया और दुनिया मे इतने सारे धर्म, मत, सम्प्रदाय और फिरक़े वुजूद में आयें।
किन्तु हमारे मालिक ने हमे ऐसे ही नहीं छोड़ दिया।
उस अति कृपालु महान अल्लाह ने हमारे मार्गदर्शन के लिये नबी यानी अपने सन्देष्टा भेजे।
ताकि वह मनुष्यों को उनके जीवन के वास्तविक उद्देश्य से अवगत करायें, और अंतिम सन्देष्टा मुहम्मद (सल्लo) के साथ इन सन्देष्टाओ की श्रृंखला को पूर्ण कर दिया।












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