"मनुष्य मात्र एक जीव नहीं हैं बल्कि यह अल्लाह की सर्वश्रेष्ठ रचना है जिसे उसने सर्वश्रेष्ठ कार्य अर्थात अपनी इबादत के लिए पैदा किया हैं।"
ईश्वर (अल्लाह) ने दुनिया मे सारी चीज़ें मनुष्य के उपयोग और उपभोग के लिए बनायी है अगर आप अपने आसपास दृष्टि डालें और ग़ौर करें तो आप देखेंगे कि हर वस्तु कही ना कहीं मनुष्य को ही लाभ पहुंचाती हैं ज़मीन फसल पैदा करती हैं तो क्या वो स्वयं उसे इस्तेमाल करती है? नहीं,
क्या वृक्ष अपने फल ख़ुद खा जाता है? नहीं,
क्या सूर्य अपनी अग्नि स्वयं के लिए इस्तेमाल करता हैं? नहीं, क्या समुंदर अपना पानी स्वयं पी जाता हैं? नहीं,
क्या भेड़ अपना ऊन स्वयं इस्तेमाल करती हैं? नहीं।
फिर इन सारी चीज़ों का सर्वाधिक लाभ कौन उठाता है?
ज़ाहिर सी बात है मनुष्य और सिर्फ यह ही नहीं इसके अलावा भी संसार मे जो कुछ भी है कही ना कही उससे मनुष्य को ही लाभ पहुंचता हैं।
तो यह सारी सृष्टि ईश्वर (अल्लाह) ने मनुष्य के लिए बनायी मगर मनुष्य को उसने किस लिए बनाया?
यह बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल हैं इसी सवाल से ही मानवता का अस्तित्व है और इसी प्रश्न का जवाब पाकर ही मनुष्य निजात अथवा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग पा सकता है।
ईश्वर ने मनुष्य को अपनी इबादत के लिए पैदा किया साथ ही मुक्त-इच्छा यानी freewill दी यह आज़माने के लिए की इतना सब कुछ उसके लिए करने के बावजूद भी मनुष्य ईश्वर (अल्लाह) के बताए मार्ग को अपनाता हैं या उसके विरुद्ध शैतान (राक्षस) के मार्ग पर चलता है? यह ही मनुष्य की अस्ल परीक्षा है, अगर वो परीक्षा में सफल होता है और ईश्वर के बताए मार्ग पर चलता है तो इस छोटे से जीवन के बाद जो सदैव का अनंत जीवन हैं उसमें वह हर वस्तु से सुसज्जित सुखमय जीवन वाले स्वर्ग अर्थात जन्नत में रहेगा अन्यथा अगर वह ईश्वर से बगावत वाला राक्षसी मार्ग अपना कर जीवन गुज़ारता हैं तो वह अनंत दुखों और यातनाओं वाले नर्क जहन्नुम में कभी ना समाप्त होने वाला जीवन गुज़ारेगा। अब यह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह कौनसा मार्ग अपनाता हैं?
ईश्वर ने मनुष्य को मुक्त इच्छा (freewill) दी है कि वह इस जीवन में जैसे जी चाहे कर्म करें चाहे तो छुरी से किसी की हत्या कर दें और चाहें तो उसी छुरी से सब्ज़ी काटकर भूखे को खाना खिलाएं यह मुक्त रूप से उसका स्वयं का निर्णय है, हाँ फिर यह भी बता दिया है कि सारे मनुष्य को लौट कर ईश्वर के पास वापस आना है और फिर ईश्वर की अदालत में प्रत्येक मनुष्य से उसके हर एक कर्म का हिसाब लिया जायेगा जो उसने दुनिया में किया था और फिर उसके ईमान और कर्मो के अनुसार ही उसका फैसला होगा।
#जीवनकाउद्देश्य #क़िस्मत #PurposeOfLife
ईश्वर (अल्लाह) ने दुनिया मे सारी चीज़ें मनुष्य के उपयोग और उपभोग के लिए बनायी है अगर आप अपने आसपास दृष्टि डालें और ग़ौर करें तो आप देखेंगे कि हर वस्तु कही ना कहीं मनुष्य को ही लाभ पहुंचाती हैं ज़मीन फसल पैदा करती हैं तो क्या वो स्वयं उसे इस्तेमाल करती है? नहीं,
क्या वृक्ष अपने फल ख़ुद खा जाता है? नहीं,
क्या सूर्य अपनी अग्नि स्वयं के लिए इस्तेमाल करता हैं? नहीं, क्या समुंदर अपना पानी स्वयं पी जाता हैं? नहीं,
क्या भेड़ अपना ऊन स्वयं इस्तेमाल करती हैं? नहीं।
फिर इन सारी चीज़ों का सर्वाधिक लाभ कौन उठाता है?
ज़ाहिर सी बात है मनुष्य और सिर्फ यह ही नहीं इसके अलावा भी संसार मे जो कुछ भी है कही ना कही उससे मनुष्य को ही लाभ पहुंचता हैं।
तो यह सारी सृष्टि ईश्वर (अल्लाह) ने मनुष्य के लिए बनायी मगर मनुष्य को उसने किस लिए बनाया?
यह बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल हैं इसी सवाल से ही मानवता का अस्तित्व है और इसी प्रश्न का जवाब पाकर ही मनुष्य निजात अथवा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग पा सकता है।
ईश्वर ने मनुष्य को अपनी इबादत के लिए पैदा किया साथ ही मुक्त-इच्छा यानी freewill दी यह आज़माने के लिए की इतना सब कुछ उसके लिए करने के बावजूद भी मनुष्य ईश्वर (अल्लाह) के बताए मार्ग को अपनाता हैं या उसके विरुद्ध शैतान (राक्षस) के मार्ग पर चलता है? यह ही मनुष्य की अस्ल परीक्षा है, अगर वो परीक्षा में सफल होता है और ईश्वर के बताए मार्ग पर चलता है तो इस छोटे से जीवन के बाद जो सदैव का अनंत जीवन हैं उसमें वह हर वस्तु से सुसज्जित सुखमय जीवन वाले स्वर्ग अर्थात जन्नत में रहेगा अन्यथा अगर वह ईश्वर से बगावत वाला राक्षसी मार्ग अपना कर जीवन गुज़ारता हैं तो वह अनंत दुखों और यातनाओं वाले नर्क जहन्नुम में कभी ना समाप्त होने वाला जीवन गुज़ारेगा। अब यह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह कौनसा मार्ग अपनाता हैं?
ईश्वर ने मनुष्य को मुक्त इच्छा (freewill) दी है कि वह इस जीवन में जैसे जी चाहे कर्म करें चाहे तो छुरी से किसी की हत्या कर दें और चाहें तो उसी छुरी से सब्ज़ी काटकर भूखे को खाना खिलाएं यह मुक्त रूप से उसका स्वयं का निर्णय है, हाँ फिर यह भी बता दिया है कि सारे मनुष्य को लौट कर ईश्वर के पास वापस आना है और फिर ईश्वर की अदालत में प्रत्येक मनुष्य से उसके हर एक कर्म का हिसाब लिया जायेगा जो उसने दुनिया में किया था और फिर उसके ईमान और कर्मो के अनुसार ही उसका फैसला होगा।
#जीवनकाउद्देश्य #क़िस्मत #PurposeOfLife












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